डॉ. कै. सिवन

अध्यक्ष इसरो, सचिव डीवोएस

chairmanडॉ. के सिवन ने बीएससी, गणित, मदुरै विश्वविद्यालय (1977), बी.टेक, एरोनॉटिक्स, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, चेन्नई (1980) एमई, एयरोस्पेस, आईआईएससी, बेंगलुरू (1982) और पीएचडी, एयरोस्पेस, आईआईटी, बॉम्बे, 2007 का अध्ययन किया। । वर्ष 1982 में उनकी नियुक्ति इसरो में हुई और उन्हें पीएसएलवी परियोजना में शामिल किया गया। उन्हें वांतरिक्ष इंजीनियरिंग, तरिक्ष परिवहन प्रणालियां इंजीनियरिंग, प्रक्षेपण यान एवं मिशन डिजाइन, नियंत्रण एवं दिशा निर्देशन डिजाइन मिशन, अनुकारक सॉफ्टवेयर डिजाइन, मिशन सिन्थैसिस, अनुकारक, विश्लेषण एवं उड़ान प्रणालियां के वैधीकरण में विशेषज्ञता प्राप्त है।

उन्होंने आद्योपांत (आरंभ से लेकर अंत तक) मिशन नियोजन, डिजाइन, एकीकरण और विश्लेषण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके अभिनव योगदान, विशेष रूप से मिशन डिजाइन में अपनाई गई पद्धतियों ने पीएसएलवी के लगातार प्रदर्शन को सक्षम किया। यह इसरो के अन्य प्रक्षेपण यानों जैसे जीएसएलवी एमके II एवं एमके III के लिए अच्छी नींव साबित हुई है जिसमें आरएलवी-टीडी भी शामिल है। वे 6डी प्रक्षेपण पथ (ट्रैजेक्टरी) अनुकारण सॉफ्टवेयर प्रमुख रचनाकार, सितारा जो कि इसरो के सभी प्रक्षेपण यानों के वास्तविक काल एवं गैर वास्तविक काल प्रक्षेपण पथ अनुकरण के लिए प्रमुख आधार हैं।

वे दिन के समय प्रक्षेपण को सक्षम बनाने में प्रमुख डेवलेपर रहे हैं, उनके द्वारा विकसित वायु/पक्षपातपूर्ण पद्धतियों के कारण हर मौसम में प्रक्षेपण आसान हो गया। जीएसएलवी के परियोजना निदेशक के रूप में, डिजाइन संबंधित मामलों का समाधान एवं जीएसएलवी को प्रचालित करने के लिए उत्तरदायी हैं जिसमें स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन की उड़ान संबंधित जांच तथा चरण-4 जीएसएलवी एमके II का सफल प्रक्षेपण भी शामिल है। उन्होंने स्क्रैमजैट (SCRAMJET) इंजन की उड़ान की जांच के साथ-साथ पुनर्प्रापण प्रक्षेपण यान (RLV-TD) के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने पीएसएलवी का उपयोग करते हुए मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) प्रक्षेपण के लिए एक लागत प्रभावी रणनीति तैयार की। वह पीएसएलवी के एकल मिशन में 104 उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण के लिए मुख्य मिशन वास्तुकार थे।

उन्होंने इसरो के प्रक्षेपण यान कार्यक्रम के लिए समानांतर गणना सुविधा एवं हाइपरसोनिक वायु टनल सुविधा, मिशन सिन्थैसिस तथा अनुकरण सुविधा स्थापित की। उन्होंने Li-Ion सेल्स, इलैक्ट्रिक प्रणोदन (प्रोपल्सन) के लिए तकनीकी विकास कार्यक्रम का आरंभ किया और इसके साथ ही इसरो के प्रक्षेपण यान कार्यक्रम के लिए उन्नत उड्डयानिकी (एवियोनिक्स) विकसित किए। ली-आयन सेल और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन को प्रक्षेपण यानों के साथ-साथ उपग्रहों में भी शामिल किया गया है।

पदों पर कार्य: निदेशक, वीएसएससी (2015-2017), निदेशक, एलपीएससी (2014-2015), परियोजना निदेशक, जीएसएलवी (2011-2013), सदस्य, अंतरिक्ष आयोग (2016-2017), उपाध्यक्ष, इसरो परिषद (2016- 2017),

पुरस्कार और सम्मान: "श्री हरिओम आश्रम प्रेरित डॉ. विक्रम साराभाई रिसर्च अवार्ड", 1999, इसरो मेरिट अवार्ड, 2007, "डॉ। बिरेन रॉय अंतरिक्ष विज्ञान और / या डिज़ाइन अवार्ड", 2011, एमआईटी एलुमनी एसोसिएशन, 2013 से प्रतिष्ठित अलंकस पुरस्कार , 2016 में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए इसरो पुरस्कार, आईआईटी-बॉम्बे, से 2017 में प्रतिष्ठित पूर्व छात्र पुरस्कार, डॉक्टर ऑफ साइंस (ऑनोरिस कॉसा), सत्यभामा विश्वविद्यालय और डॉ एमजीआर विश्वविद्यालय, चेन्नई