महासागर विज्ञान

उपग्रह सुदूर संवेदन के आगमन ने पृथ्वी के वायुमंडलीय और महासागर प्रक्रियाओं की निगरानी के एक नए युग की शुरुआत की है। उपग्रह संवेदक वायुमंडल और महासागर व उनकी गतिशीलता के महत्वपूर्ण घटकों का अध्ययन और समझने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं। उपग्रह आंकड़े उत्पादों का उपयोग प्रचालनात्मक रूप से भारतीय मौसमविज्ञान विभाग (आईएमपडी), मध्यमवर्गीय मौसम पूर्वानुमान (एनसीएमआरडब्यूएफ), भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसमविज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) एवं भारतीय महासागर सूचना सूचना सेवा केन्द्र (इनकॉइस) को मौसम, जलवायु एवं महासागर के संबंध में सूचना एवं सलाहकार सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। एनआरएससी का पृथ्वी एवं जलवायु विज्ञान क्षेत्र एक युग्मित प्रणाली के रूप में पृथ्वी के अध्ययन को महत्व देता है जिसमें उपग्रह, भूमि पर्यवेक्षण एवं मॉडलिंग के साथ भूमि-वायु-महासागर का आपसी संबंध शामिल है। ईसीएसए के कार्यकारी घटक में भूमि सतह प्रक्रिया एवं जलवायु मॉडलिंग, भू-भाग विज्ञान, जलवायु विज्ञान, महासागर विज्ञान शामिल है। महासागर के मॉडल का अध्ययन करने के लिए महासागर ताप ट्रान्सपोर्ट, महासागर हिम का बनना एवं लवणता की एनर्जेटिक्स में परिवर्तन के पर्यवेक्षणों की आवश्यकता होती है। आवश्यक जलवायु परिवर्ती में सागर सतह तापमान, सागर-सतह लवणता, सागर स्तर, सागर की स्थिति, सागर हिम, धारा, सागर वर्ण (जैव विज्ञानी गतिविधियों), सतह के स्तर एवं तापमान पर कार्बन डाई ऑक्साइड का आंशिक दबाव, लवणता, धारा, पोषकता, कार्बन, महासागर ट्रेसर, उप-सतह स्तर पर जलप्लावक शामिल हैं।

सागर वर्ण सुदूर संवेदन

महासागर जल से सौर परावर्तित विकीरण के स्पैक्ट्रम से जल घटकों के मात्रात्मक आकलन महासागर वर्ण सुदूर संवेदन का प्रमुख उद्देश्य है। पृथ्वी की सतह पर सौर विकिरण घटना में, स्पेक्ट्रम का केवल वीआईएस-एनआईआर भाग (~ 400 से 700 एनएम) पानी में प्रवेश करता है। यह विकिरण, पानी में प्रवेश करने के बाद, पानी के अणुओं और महासागर के पानी के घटकों द्वारा कई तरह के अवशोषण से गुजरता है और इस विकिरण का एक छोटा भाग पानी से बाहर बिखरा हुआ है, जो अंतरिक्ष में सुदूर संवेदन संवेदक द्वारा पता चला है। इस चमक से - जिसे जल-छोड़ने की चमक कहा जाता है - लहर बैंड के एक चयनित समूह में पाया गया है, पानी के घटकों की सांद्रता को एक पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया के माध्यम से आकलित किया जाता है। इस प्रदीप्ति से - जल-छोड़ने की प्रदीप्ति कहा जाता है - लहर बैंड के एक चयनित समूह में पाया गया है, पानी के घटकों की सांद्रता को एक पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया के माध्यम से अनुमानित किया जाता है। ओशनसैट-2 सागर वर्ण मानीटर-II (ओसीएम-2) मिशन का उद्देश्य ओशनसैट-1 ओसीएम मिशन की निरंतरता को कायम रखना ताकि सागर वर्ण परिवर्तनों की मात्रात्मक सूचना जैसे (i) क्लोरोफिल-ll की सांद्रता (ii) 490 एनएम पर लक्षणित प्रकाश (केडी) के वर्टिकल डिफ्यूज अटेन्यूएशन, (iii) तटीय जल आदि में तलछट की कुल सांद्रता का आकलन तथा प्रयोक्ता समुदाय को ये आंकड़े आसानी से उपलब्ध कराना। यह एल्गोर्थिम सैद्धांतिक आधार प्रलेख (एटीबीडी) ओशनसैट-II सागर वर्ण मानीटर (ओसीएम)-II के लिए भू-भौतिकी प्राचलों के पुनर्प्रापण के लिए प्रयुक्त एल्गोर्थिम का वर्णन करता है। इस प्रलेख में ओसीएम-II आंकड़ों के वायुमंडलीय त्रुटि सुधार के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का वर्णन किया गया है और साथ ही सागर वरण परिवर्तनों यथा क्लोरोफिल-ए सांद्रता, 490 एनएम पर वर्टिकल डिफ्यूज अटेन्यूएशन (केडी), कुल तलछट सामग्री (टीएसएम) जैसे 865 एनएम तरंगदैर्ध्य पर महासागरीय क्षेत्रों में वायुविलय प्रकाशीय गहराई (एओडी) जैसे वायुमंडलीय परिवर्तनों के जल के भीतर के एल्गोर्थिमों का उपयोग किया जाता है।

Potential Fishing Zone

महासागर वर्ण मानीटर (ओसीएम)-II उपकरण को महासागर वर्ण के मापन के लिए डिजाइन किया गया है। प्रदीप्ति छोड़ते समय जल का स्पैक्ट्रमी परिवर्तन जलप्लावकों के पिगमैंट्स, तलछट की सामग्री एवं तटीय तथा महासागरीय जल में घुले हुए रंगीन जैविक पदार्थ तथा वायुमंडलीय वायुविलयों के लक्षणन से संबंधित हो सकता है। ओशनसैट-II ओसीएम-II नीतभार ओशनसैट-I ओसीएम की अगली पीढ़ी का है जिसे भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा मई 1999 में प्रक्षेपित किया गया था। ओशनसैट-II ओसीएम-II में केवल बैंड 6 एवं 7 को लेकर छोटा सा स्पैक्ट्रल शिफ्ट है जो कि ओशनसैट-I ओसीएम-I के अंशाकन में नहीं था। स्पैक्ट्रमी बैंड 6 जो कि ओशनसैट-I में 670 एनएम पर था जिसे 620 एनएम में बदला गया है ताकि तलछट में जमा सेडिमेन्टस के बारे में बेहतर मात्रात्मक सूचना प्राप्त हो सके। स्पैक्ट्रमी बैंड 7 जो कि ओशनसैट-I में 765 एनएम पर स्थित था उसे 740 एनएम पर रखा गया ताकि ओशनसैट-II ओसीएम-II के मामले में ऑक्सीजन का अवशोषण को नजर अंदाज किया जा सके। ओशनसैट-II ओसीए आठ स्पैक्ट्रमी बैंडों में आंकड़े एकत्र करेगा। ओसीएम का बिंबन सिद्धांत पुश रूम तकनीक पर आधारित है। जो कि आरआरएस श्रृखला के पहले कि मिशनों में रेखीय बिंबन स्वतः क्रमवीक्षण (लिस) कैमरे के लिए भी इस्तेमाल की जाती है। प्रत्येक बैंड के लिए एक अलग रिफ्रैक्टिव ऑप्टिक्स है। प्रत्येक बैंड के संसूचक के रूप में ऑप्टिक्स के प्रमुख प्लेन में रेखीय आवेशित युग्मित उपकरण (सीसीडी) है। संसूचक के आउटपुट नीतभार इलैक्ट्रॉनिक्स द्वारा संसाधित किये जाते हैं। प्रत्येक बैंड में अलग संसूचक हैं, जिन्हें ऑप्टिक्स या कैमरा इलैक्ट्रॉनिकस कहते हैं तथा ये 6के 2 पोर्ट सीसीडी का इस्तेमाल करते हैं जिसमें से 3730 चित्रण पिक्सैल हैं। संवेदक कम प्रदीप्ति पर उच्च विकीरणमितिक निष्पादन उपलब्ध कराता है तथा इसेम पथ के साथ ट्रैक झुकाव (± 20º) का प्रावधान होता है ताकि सूरज की रोशनी से बचा जा सके।

भूभौतिकी उत्पाद ओशनसैट-II ओसीएम आंकड़ों से तैयार किए जाते हैं। 412, 443, 490, 510 and 555-एनएम बैंडों में जल छोड़ने की प्रदीप्ति वायुमंडलीय त्रुटि सुधार प्रक्रिया की आउटपुट होगी तथा आगे चल कर इसका उपयोग जैव-भू-भौतिकी परिवर्तनों के आकलन में किया जाएगा। क्लोरोफिल-ए उत्पाद की उपस्थिति को सागर जल में जलप्लावकों की उपस्थिति के रूप में माना जाएगा क्योंकि क्लोरोफिल-ए अधिकांश जलप्लावकों में पाया जाने वाला उत्पाद है। डिफ्यूज़ अटेन्यूएशन कोएफिशिएन्ट (केडी) उत्पाद स्पष्ट ऑप्टिकल संपत्ति है जो जल में गहराई के साथ कम होती डाउनवैलिंग प्रदीप्ति को कम करने की दर को दर्शाती है। कुल तलछट सामग्री (टीएसएम) उत्पाद तटीय जल में ख्य रूप से तलछट के रूप में उपस्थित अजैविक पदार्थों के मात्रात्मक मापन उपलब्ध कराती है। वायुविलय ऑप्टिकल गहराई (एओडी) एक तरह से वायुमंडलीय गंदगी का मापन है जिसका लक्षणन 865 एनएम पर किया जाएगा क्योंकि यह तरंगदैर्ध्य महासागरीय जल से परावर्तन के प्रति लगभग असंवेदनशील है।

ओसीए-2 से प्राप्त भूभौतिकी आंकड़े उत्पादों के वैधीकरण के लिए भारत के संपूर् पूर्वी तट में कई वैधीकरण एवं आंकड़ा एकत्र करने के अभियान चलाए गए। इन यात्राओं में से कुछ यात्राएं विशेष रूप से शैवालों के खिलने की पहचान करने के लिए की गई तथा इसके साथ ही हाइपरस्पैक्ट्रमी जलगत विकीरणमिति के उपयोग से पूर्वी तट के निकटतटीय जल के स्पैक्ट्रमी लक्षणन का अध्ययन भी किया गया। हांलाकि, यह स्व-स्थाने आंकड़े तटीय महासागर जल के लिए एक स्पैक्ट्रमी लाइब्रेरी तैयार करने के लिए एक आधार के रूप में प्रयुक्त होगी ताकि तटीय महासागर जल में ऑप्टिकल तरीके से सक्रिय घटकों के आकलन के लिए जैव-ऑप्टिकल एल्गोर्थिम के वैधीकरण व विकास किया जा सके जिसकी प्रकृति काफी जटिल है। ओशनसैट-2 ओसीएम अनुप्रयोगों के लिए वायुमंडली त्रुटि सुधार एल्गोर्थिम के वधीकरण के लिए यात्रा के दौरान वायुमंडलीय प्राचल जैसे एओडी का मापन किया गया। यह एओडी आंकडे महासागरीय तटीय क्षेत्रों में वायुमंडलीय त्रुटिसुधार एल्गोर्थिम विकसित करने के लिए एक आंकड़ा आधार के रूप में काम आएगा।

प्रमुख कार्य

प्रमुख लाभ

  • पीएफजेड पूर्वानुमान से लगभग 40,000 प्रयोक्ता नियमित रूप से लाभान्वित होते हैं।
  • अन्तरिक्ष सूचना निवेश से मौसम एवं चक्रवात के बारे में चेतावनी देने में काफी सुधार हुए हैं।
  • प्रवाल भित्तियों के मानीटरन एवं संरक्षण
  • महासागर स्थिति पूर्वानुमान भारतीय नौसेना, भारतीय तट रक्षक, सामान एवं यात्रियों को लाने ले जाने वाली एजेन्सियों, तट से दूर तेल एवं गैस का खनन करने वाली एजेन्सियों, मछुआरों एवं बंदरगाहों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध हुई हैं।

प्रचालनात्मक उत्पाद / सेवाएं

  • ओशनसैट 2 एवं सरल उत्पाद
  • उत्तरी हिन्द महासागर में शैवालों के खिलने की पहचान <
  • महासागर ताप घटक (ओएचसी)
  • उष्टकटिबंधीय चक्रवात ताप क्षमता (टीसीएचपी)
  • महासागर सतह हवाएं
  • हवाओं का दबाव
  • हवा के मोड़

शोध क्षेत्र

  • तटीय एवं अंतर-तालों में जल की गुणवत्ता
  • उच्च विभेदन तटीय एवं महासागर की स्थिति का पूर्वानुमान
  • ध्रुवीय पर्यावरण मानीटरन
  • अधिक तीव्रता से वर्षापात की घटनाओं जैसे भयंकर तूफान की चेतावनी
  • वायुविलय एवं मेघ अन्योन्यक्रिया

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