इसरो आपदा प्रबंधन कार्यक्रम

decentralised_planningआपदा प्रबंधन सहायता कार्यक्रम (डीएमएसपी) के अन्तर्गत एनआरएसी में स्थापित निर्णय सहायता केंद्र (डीएससी) आपदा पूर्व, आपदा के दौरान और आपदा-बाद के चरणों के आपदा प्रबंधन में प्रयोग के लिए अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ा परतों के साथ हवाई एवं अंतरिक्ष आधारित दोनों सूचनाओं के लिए एकल विंडो आपूर्ति प्रणाली है। डीएससी पांच प्राकृतिक आपदाओं को संबोधित करता है जिसमें बाढ़, चक्रवात, दावाग्नि, भूकंप और भू-स्खलन शामिल है।डीएससी टीम देश में आपदा की स्थिति पर गहरी नजर रखती है और प्रभावित क्षेत्रों का उपग्रह/हवाई आंकड़ा अभिग्रहण करती है। आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है और त्वरित मानचित्रण और आकलन किया जाता है तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों को एफटीपी, वेब पेज, ई-मेल आदि के माध्यम से गृह मंत्रालय (एमएचए) और नोडल मंत्रालयों को वितरण किया जाता है। केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार प्रयोक्ता विभागों को अंतरिक्ष-सक्षम सूचनाओं के ऑनलाइन स्थानांतरण के लिए वीसैट आधारित उपग्रह संचार नेटवर्क स्थापित किया गया है। उत्पादों को व्यापक सार्वजनिक प्रदर्श/उपयोग हेतु वेब पोर्टल, यथा-भुवन, एनआरएससी और एनडीईएम पर भी होस्ट किया जाता है। डीएससी दीर्घकालिकआपदा न्यूनीकरण और पुनर्वास जैसे- जोखिम क्षेत्रीकरण, जोखिम की ओर उन्मुख (अतिसंवेदनशीलता) और जोखिम आकलन हेतु अंतरिक्ष-इनपुट पर कार्य कर रहा है। डीएससी प्रमुख आपदा और अंतरिक्ष पर अन्तर्राष्ट्रीय चार्टर, सेंटिनेल एशिया और यूएनईएससीएपी/यूनएसपीआईडीईआर जैसे फोरम के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय आपदाओं पर उपग्रह आंकड़ा सहायता प्रदान करता है।डीएससी पूर्वानुमान और पूर्व-चेतावनी के लिए मॉडल सुधारने पर भी कार्य कर रहा है।

भारत में 1989 से राष्ट्रीय कृषि सूखा आकलन और मोनिटरण प्रणाली(एनएडीएएमएस) परियोजना के माध्यम से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सूचनाओं के प्रयोग से कृषि सूखा आकलन प्रचालनात्मक है।

डीएससी, एनआरएससी की उपलब्धियां-

  • उपग्रह/हवाई आंकड़ा के प्रयोग से लगभग वास्तविक समय में,देश में प्रमुख बाढ़ों और चक्रवातों का मानचित्रण एवं निगरानी की गई तथा राहत प्रबंधन में सहायता के लिए नोडल मंत्रालयों, केंद्रीय और राज्य सरकार के विभागों को अचानाक बाढ़ की सूचना दी गई है।इनमें से कुछ हाल की घटनाओं जैसे- जम्मू-कश्मीर बाढ़ और 2014 में चक्रवात हुदहुद , उत्तराखंड बाढ़ और 2013 में चक्रवात फैलिन, 2012 में असम में अप्रत्याशित बाढ़ आदि शामिल हैं।
  • असम और बिहार के लिए बाढ़ जोखिम क्षेत्रीकरण एटलस का विमोचन
  • देश में बाढ़ संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक आकलन
  • उच्च विभेदन आंकड़ों के प्रयोग से सिक्किम में लहनोक-झील और तिब्बत में परीचु-झील की बारीकी से निगरानी
  • लिडार आधारित तुंगता (उत्थापन) आंकड़ों के प्रयोग से स्थानिकबाढ़ - अचानक बाढ़ मॉडल का विकास
  • अन्तर्राष्ट्रीय चार्टर और सेटिनेल एशिया फोरम के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय आपदाओं में सहायता

प्रगतिरत परियोजनाएं

  • आपातकालीन प्रबंधन हेतु राष्ट्रीय आंकड़ा आधार (एनडीईएम)

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