अनुप्रयोग

एनआरएससी ने हैदराबाद, बैंगलोर तथा कोलकाता के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के लिए 1:6000 हवाई फोटोग्राफ से 1:1000(गुण सूचना सहित) पर बृहत पैमाना 3 डी भूस्थानिक का निर्माण किया है । फोटोग्रामितीय तकनीकों का उपयोग करते हुए एक विस्तृत तल स्तरीय मानचित्रण किया गया ।

संपन्न परियोजनाएं

3डी मानचित्रण

एनआरएससी ने हैदराबाद, बैंगलोर तथा कोलकाता के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के लिए 1:6000 हवाई फोटोग्राफ से 1:1000(लक्षण सूचना सहित) पर बृहत पैमाना 3 डी भूस्थानिक का निर्माण किया है । फोटोग्रामितीय तकनीकों का उपयोग करते हुए एक विस्तृत तल स्तरीय मानचित्रण किया गया । फोटोग्रामितीय तकनीकों का उपयोग करते हुए एक विस्तृत तल स्तरीय मानचित्रण किया गया । जीएआईएस उपयोगिता अनुप्रयोगों जैसे शहरी नियोजन, जल तथा मल निकासी प्रबंधन, यातायात, राजस्व कर वसूली, जंजाल निष्पादन, दूरसंचार सेवाएं तथा दैनंदिन परिचालनों और भविष्य नियोजन तथा विकास के अन्य स्थिति अधारित सेवाओं में दीर्घ पैमाना 3डी भूस्थानिक/गैरस्थानिक आंकड़ा समूह अपरिहार्य हो गए हैं । इसके लाभ में एक सटीक 3डी आधार मानचित्र, विशाल अवसंरचना आंकड़ापत्र शामिल हैं जो भविष्य नियोजन तथा 3डी दृश्यन में समग्र पहुंच प्रदान करते हैं ।

भूसंपत्ति मानचित्रों का निर्माण

हवाई फोटोग्राफी (1:10000) एवं फोटोग्रामितीय तकनीकों का उपयोग करते हुए आंध्रप्रदेश के निजामाबाद जिला के 6600 वर्ग किमी क्षेत्र का भू-संपत्ति मानचित्रण देश में अपनी तरह की प्रथम बेजोड़ परियोजना है जो इतने बड़े क्षेत्र के लिए चलाई गई है । 25 सेमी की परिशुद्धता के साथ निरंतरतायुक्त ऑर्थो-उत्पाद इस जिले के लिए तैयार किया गया है । एक एकीकृत भूमि सूचना प्रणाली के रूप में इस प्रारंभिक भूसंपत्ति पुनःसर्वेक्षण अनुप्रयोग को सर्वेक्षण बंदोबस्त तथा भूमि अभिलेख, आंध्र प्रदेश सरकार के लिए पूरा किया गया । सबसे महत्त्वपूर्ण योगदानों में भूसंपत्ति पुनःसर्वेक्षण के लिए पहली बार विशद 7400 फ्रेमों का एरोट्राइंगुलेशन एवं ब्लॉक स्तर पर समायोजन, भूसंपत्ति पुनःसर्वेक्षण अनुप्रयोगों के लिए प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, भूसंपत्ति सर्वेक्षण के लिए अनुप्रयोग, समग्र जिले के लिए निरंतरतायुक्त डिजिटल ऑर्थो चित्र जिसकी स्थिति की परिशुध्दता 25 सेमी है जो कि भूसंपत्ति के पुनः सर्वेक्षण के लिए होती है तथा फूल्ड सर्वेक्षण मापनों के साथ डिजिटल ऑर्थो फोटो का सफलतापूर्वक वैधीकरण शामिल है।

आपदा प्रबंधन के लिए वायुवाहित सार एवं लिडार

वायुवाहित लिडार/डिजिटल कैमरा के आंकड़ों का उपयोग करते हुए एनआरएससी ने इसरो के आपदा प्रबंधन समर्थन कार्यक्रम के अन्तर्गत ओडिसा के 8000 वर्ग किमी क्षेत्र के लिए बाढ़ मैदान मानचित्रण परियोजना को कार्यान्वित किया है। स्थिति तथा प्रवृत्ति निर्धारण हेतु लिडार/डिजिटल कैमरा जीपीएस एवं आईएमयू के साथ करीबी रूप से संयुक्त रहता है। इस आंकड़े को भू-संदर्भित लिडार बिन्दु मेघ आंकडा, डिजिटल सतह मॉडल तथा डिजिटल कैमरा चित्रों को प्राप्त करने के लिए पश्च-संसाधित किया जाता है। लिडार आंकड़ों के वर्गीकरण के द्वारा डिजिटल ऊंचाई मॉडल का निर्माण किया जाता है तथा ऑर्थोफोटो का निर्माण डीईएम चित्रों की सहायता से किया जाता है। परिणामस्वरूप 1:5000 में ऑर्थोफोटो से 2डी मानचित्रओं का निर्माण किया जाता है। इस परियोजना से प्राप्त होने वाली वस्तुओं में लिडार से 0.5मी कंटूर अंतराल वाले निकट कंटूर, लिडार से प्राप्त डिजिटल कैमरा बिम्बों एवं डीईएम का उपयोग करते हुए ऑर्थोफोटो, 1:5000 पर ऑर्थोफोटो से जीआईएस संगत आधारमानचित्र शामिल हैं। इसरो के आपदा प्रबंधन समर्थन कार्यक्रम के हिस्से के रूप में आपदा प्रबंधन के लिए सैक, अहमदाबाद में स्वदेशी रूप से विकसित हवाई संश्लेषित द्वारक रडार (एसएआर) का परीक्षण उड़ान एनआरएससी ने आयोजित किया है। यह एक सक्रिय संवेदक है जिसमें मेघ भेदन तथा सभी मौसम में बिम्बन क्षमता है जिसका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं से विशेषकर बाढ़ से प्रभावित विशाल क्षेत्रों के मानचित्रण और मॉनिटरन में किया जाता है। डीएम-सार प्रणाली का प्राथमिक लक्ष्य आपदा स्थिति में क्षति आकलन, कम से कम बिलंब पर राहत और बचाव अभियान के लिए आंकड़ा उत्पाद का निर्माण करना है। शीघ्र ही सार का उड़ान मॉडल प्रचालन में शामिल किया जाएगा।

एनयूआईएस परियोजना के लिए 146 शहरों की हवाई फोटोग्राफी
मार्च 2006 में शहरी विकास मंत्रालय ने दसवें पंचवर्षीय योजना के दौरान दो पैमानों पर यथा 1:10000 & 1:2000 देश के 137 शहरों/महानगरों के लिए जीआईएस आंकड़ासमूहों को विकसित करने के लिए प्रायोगिक आधार पर एनयूआईएस योजना का आरंभ किया है। 24 शहरों के लिए 1:1000 पैमाने पर उपयोगिता मानचित्रण भी किया जाएगा। निर्मित भूस्थानिक और प्रवृत्ति आंकड़ासमूह मास्टर/विकास योजनाओं को तैयार करने में, विस्तृत शहर नियोजन में सहायक होगा तथा निर्णय-समर्थन के रूप में सेवाएं देगा। एएस एवं डीएमए ने न्यूनतम 25 वर्ग किमी विस्तार वाले प्रत्येक क्षेत्र में दो वर्षों के समयावधि में 1:10000 पैमाने पर 60% (अग्र) & 30% (पार्श्व) व्याप्ति के साथ भारत के 29 राज्यों में फैले 132 शहरों का हवाई फोटोग्राफी किया है।

मालदीव गणराज्य की हवाई फोटोग्राफी तथा मानचित्रण
मालदीव द्वीपसमूह 80000 वर्ग कि.मी. जल में फैले 300 वर्ग कि.मी. स्थल क्षेत्र में फैले 1189 द्वीपों से बना हुआ है। मालदीव का मानचित्रण एक चुनौती है क्योंकि नियंत्रण संभव नहीं है। एनआरएससी ने इस कार्य को विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के लिए पूरा किया है। कार्यप्रणाली में पूरे मालदीव की हवाई फोटोग्राफी, कम्प्यूटर नियंत्रित नौवहन प्रणाली से युक्त बृहत पैमाना मैट्रिक कैमरे से हवाई फोटोग्राफी और केजीपीएस, डीजीपीएस नियंत्रण सर्वेक्षण,फोटोग्रामितिक स्कैनरों पर स्कैनिंग, हवाई ट्राइंगुलेशन एवं प्रखंड समायोजन, डीईएम/कंटूर निर्माण, 3डी मार्ग तथा क्षेत्र सत्यापन शामिल है। 1:40,000 पैमाने पर पूरे मालदीव गणराज्य तथा 1: 6000 पैमाने पर चुने हुए द्वीपों के लिए हवाई फोटोग्राफी की आवश्यकता थी। हवाई फोटोग्राफी के साथ 5मीX5मी आयाम वाले पूर्व-लक्ष्य को विभिन्न द्वीपों पर रखा गया तथा एक साथ डीजीपीएस अवलोकन को पूरा किया गया। डब्लूजीएस-84 डैटम में जीपीएस का उपयोग करते हुए पूरे मालदीव गणराज्य के लिए शून्य आदेश संदर्भ स्टेशनों को स्थापित किया गया। नवीनतम फोटोग्रामितीय तकनीकों और प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए पूरे मालदीव गणराज्य के लिए 1: 25,000 पैमाने पर तथा चुने हुए द्वीपों के लिए 1: 1000 पैमाने पर डिजिटल मानचित्रों को तैयार किया गया। माले में सुदूर संवेदन केन्द्र की स्थापना की गई।

अनुप्रयोग